Bhagat Singh biography
अमर शहीद सरदार भगत सिंह ! यह नाम सुन कर सभी भारतीयों का सिर सम्मान से उतना ही ऊंचा उठ जाता है जितना कि तिरंगे को लहराता देख कर । सरदार भगत सिंह आज के यूथ के लिए प्रेरणा बने हुए हैं। या फिर एक अलग अंदाज़ में हम ऐसे भी कह सकते है , कि आज के दौर में अपनी देशभक्ति को जाहिर करने के लिए , लोगो द्वारा प्रयोग किए जाने वाले साधनों में , तिरंगे के बाद दूसरा नंबर लघभग इन्हीं का आता है । आखिर ऐसी क्या बात है कि लोग भगत सिंह के जीवन से इतना प्रभावित होते हैं ।
ये बात भी सच है कि भगत सिंह के अलावा भी बहुत से लोगों ने देश को आज़ादी दिलाने के लिए बराबर संघर्ष किया था । और हम उन लोगो को भी काफी पसंद करते है । पर भगत सिंह की जगह हमारे दिल में कुछ खास ही है, और ये बात ज्यादातर भारतीयों को पता नहीं है कि ऐसा क्यों है ।
किसी भी व्यक्ति के दिल में इतनी बड़ी जगह बनाने के लिए लोगो को सलों लग जाते है । पर भगत सिंह
ने ये काम बहुत ही छोटी उम्र में ही कर दिखाया। तो ऐसी क्या बात है जो भगत सिंह को इतना परभावशाली बनाती हैं ? चलिए भगत सिंग के जीवन की कुछ ऐसे ही बातों को जानते है ।
जीवन परिचय
भगत सिंह का जन्म 27 सितंबर 1907 को एक सिख परिवार में हुआ। पिता किशन सिंह व माता विद्यावती को भगत सिंघ इतने प्यारे थे कि उनका नाम भागों वाला रख दिया , जिसका मतलब होता है भाग्यशाली । और इसी से इनका नाम भगत सिंह पड़ा ।
भगत सिंह बचपन से ही सबसे अलग विचार रखने वाले थे । उन के अंदर देशभक्ति कूट कूट कर भरी हुई थी।
ये बात भी सच है कि भगत सिंह के अलावा भी बहुत से लोगों ने देश को आज़ादी दिलाने के लिए बराबर संघर्ष किया था । और हम उन लोगो को भी काफी पसंद करते है । पर भगत सिंह की जगह हमारे दिल में कुछ खास ही है, और ये बात ज्यादातर भारतीयों को पता नहीं है कि ऐसा क्यों है ।
किसी भी व्यक्ति के दिल में इतनी बड़ी जगह बनाने के लिए लोगो को सलों लग जाते है । पर भगत सिंह
ने ये काम बहुत ही छोटी उम्र में ही कर दिखाया। तो ऐसी क्या बात है जो भगत सिंह को इतना परभावशाली बनाती हैं ? चलिए भगत सिंग के जीवन की कुछ ऐसे ही बातों को जानते है ।
जीवन परिचय
भगत सिंह का जन्म 27 सितंबर 1907 को एक सिख परिवार में हुआ। पिता किशन सिंह व माता विद्यावती को भगत सिंघ इतने प्यारे थे कि उनका नाम भागों वाला रख दिया , जिसका मतलब होता है भाग्यशाली । और इसी से इनका नाम भगत सिंह पड़ा ।
भगत सिंह बचपन से ही सबसे अलग विचार रखने वाले थे । उन के अंदर देशभक्ति कूट कूट कर भरी हुई थी।
फिर एक दिन भगत सिंघ बहुत छोटी सी उम्र में जलियावला बाग में गए , जहां जाने के बाद वीर भगत सिंह के में पर इतना गहरा प्रभाव पड़ा कि उन्होंने अंग्रेज़ों से बदला लेने की ठान ली ।
उन्होंने जलियावाला बाग की उस मिट्टी में से कुछ मिट्टी को अपने पास रख लिया जो भारतीयों के खून से लाल हो गई थी । और भारत को एक और महान क्रांतिकारी की प्राप्ती हुई ।
इसके बाद उन्होंने उस मिट्टी को घर पर लाकर एक शीशी मे बंद करके रख दिया ।
घर वालो ने भगत सिंह के सामने शादी करने की बात रखी पर भगत सिंह घर से भाग गए ।और एक चिठी छोड़ गए जिसपर लिखा था कि मेरी दुल्हन सिर्फ भारत आज़ादी है मै किसी और से शादी नहीं कर सकता ।
घर से भाग कर उन्होंने चन्द्र शेखर आज़ाद के साथ मिलकर एक फौज बनाई । और अंग्रेजो के खिलाफ कई प्रकार की कारवाईयां की ।जैसे लाला लाजपत राय की मौत का बदला सेंट्रल मीटिंग में बम गिराना और सांडरस की हत्या जैसे कई और कारनामे ।
इसके बाद उन्होंने उस मिट्टी को घर पर लाकर एक शीशी मे बंद करके रख दिया ।
घर वालो ने भगत सिंह के सामने शादी करने की बात रखी पर भगत सिंह घर से भाग गए ।और एक चिठी छोड़ गए जिसपर लिखा था कि मेरी दुल्हन सिर्फ भारत आज़ादी है मै किसी और से शादी नहीं कर सकता ।
घर से भाग कर उन्होंने चन्द्र शेखर आज़ाद के साथ मिलकर एक फौज बनाई । और अंग्रेजो के खिलाफ कई प्रकार की कारवाईयां की ।जैसे लाला लाजपत राय की मौत का बदला सेंट्रल मीटिंग में बम गिराना और सांडरस की हत्या जैसे कई और कारनामे ।
ये अपने देश के इतने बड़े भगत थे कि लाहौर षड्यंत्र इनका नाम आने बाद जब इनको फांसी। कि सजा सुनाई गई तो। ये खुशी से फांसी चढ़ गए।
भगत सिंह अपने आप को नास्तिक बताते थे जिसका जिक्र उन्होंने अपनी एक किताब मे किया था ।
ऐसा भी माना जाता है। कि भगत सिंह की सोच महात्मा गांधी से अलग थी। दोनों भारत कि आज़ादी को पाना तो चाहते थे ,परन्तु उनके रास्ते अलग अलग थे । गांधी जी अहिंसा माध्यम से आजादी पाना चाहते थे और भगत सिंह का मानना था कि आज़ादी पाने के लिए हिंसा भी काफी जरूरी है ।
भारत की आज़ादी के समय की एक दिलचस्प बात यह भी है कि हमरे क्रांतिकारी क्रांति के साथ साथ शायरी भी करते थे , और कुछ अंग्रेज अफसरों की लिखी हुई किताबों से पता चलता है कि शायरी उनको अंग्रेज़ों के टॉर्चर से लडने लिए सहारा देती थी । जब भी किसी क्रांतिकारी दर्द होता तो वो शायरी करने लगता थे । भगत सिंह भी कुछ इसी प्रकार के क्रांतिकारी थे ।
नारे -
उन्होंने कई प्रकार नारे भी लगाए जिनको सुनकर अंग्रेजो के पसीने छूट जाते थे जैसे
• " इंकलाब ज़िंदाबाद "
•"बम और पिस्तौल क्रांति नहीं लाते, क्रान्ति की तलवार विचारों के धार बढ़ाने वाले पत्थर पर रगड़ी जाती है।"
•"प्रेमी, पागल, और कवी एक ही चीज से बने होते हैं"
भगत सिंह अपने आप को नास्तिक बताते थे जिसका जिक्र उन्होंने अपनी एक किताब मे किया था ।
ऐसा भी माना जाता है। कि भगत सिंह की सोच महात्मा गांधी से अलग थी। दोनों भारत कि आज़ादी को पाना तो चाहते थे ,परन्तु उनके रास्ते अलग अलग थे । गांधी जी अहिंसा माध्यम से आजादी पाना चाहते थे और भगत सिंह का मानना था कि आज़ादी पाने के लिए हिंसा भी काफी जरूरी है ।
भारत की आज़ादी के समय की एक दिलचस्प बात यह भी है कि हमरे क्रांतिकारी क्रांति के साथ साथ शायरी भी करते थे , और कुछ अंग्रेज अफसरों की लिखी हुई किताबों से पता चलता है कि शायरी उनको अंग्रेज़ों के टॉर्चर से लडने लिए सहारा देती थी । जब भी किसी क्रांतिकारी दर्द होता तो वो शायरी करने लगता थे । भगत सिंह भी कुछ इसी प्रकार के क्रांतिकारी थे ।
नारे -
उन्होंने कई प्रकार नारे भी लगाए जिनको सुनकर अंग्रेजो के पसीने छूट जाते थे जैसे
• " इंकलाब ज़िंदाबाद "
•"बम और पिस्तौल क्रांति नहीं लाते, क्रान्ति की तलवार विचारों के धार बढ़ाने वाले पत्थर पर रगड़ी जाती है।"
•"प्रेमी, पागल, और कवी एक ही चीज से बने होते हैं"
दोस्तो इस महान व्यक्तित्व से हम जितना भी सीखना चाहे उतना सीख सकते हैं।
ऐसे और भी महान लोगों की कहानियां पढ़ने लिए जुड़े रहिए हमरे ब्लॉग Onlynewstime के साथ ।
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